सीमा जागरण मंच उत्तराखंड प्रांतीय समिति ने हरेला पर्व पर किया वृक्षारोपण भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में फलदार बीजों की बुआई कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

देहरादून, 9 अगस्त 2026। सीमा जागरण मंच, उत्तराखंड प्रांतीय समिति द्वारा आज हरेला पर्व के अवसर पर ग्राम गलजवाड़ी स्थित गलजवाड़ी विलेज में पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली संवर्धन का विशेष अभियान चलाया गया। इस अवसर पर समिति की बहनों एवं वरिष्ठ सदस्यों ने फलदार पौधों का वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया।
हरेला पर्व के इस आयोजन को केवल पौधारोपण तक सीमित न रखते हुए भूस्खलन एवं भू-धसाव की समस्या से जूझ रहे वन क्षेत्र में बीजों की बुआई का अनूठा प्रयास भी किया गया। क्षेत्र के ऐसे स्थान, जहां पेड़ों की कमी के कारण पहाड़ी भूमि लगातार धसक रही है और मिट्टी नीचे की ओर खिसक रही है, वहां बहनों ने स्वयं कुदाल से मिट्टी खोदकर विभिन्न फलदार वृक्षों की गुठलियां एवं बीज बोए।
स्लोचना बिष्ट एवं आसा नौटियाल दीदी ने विशेष रूप से इस कार्य में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए जामुन, आम, आड़ू, करोंदा, इमली आदि के बीजों की बुआई की। इन बीजों को घरों में खाए गए फलों से एकत्रित किया गया था। उद्देश्य यह है कि आगामी बरसात में इन बीजों से पौधों का अंकुरण हो, उनकी जड़ें मिट्टी को मजबूती प्रदान करें और धीरे-धीरे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को स्थिरता मिले।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पहाड़ों में वृक्ष केवल हरियाली का माध्यम नहीं, बल्कि मिट्टी और पहाड़ को थामे रखने वाली प्राकृतिक शक्ति हैं। जब ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पेड़ों की संख्या कम होती है तो वर्षा के दौरान मिट्टी का कटाव और भू-धसाव तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बीजों की बुआई और वृक्षारोपण भविष्य में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इसके साथ ही फलदार पौधों—मौसमी, नींबू, अनार आदि—का भी रोपण किया गया। पौधों की सुरक्षा के लिए उन्हें बाउंड्री के भीतर लगाया गया, ताकि वन्य पशुओं से उनकी रक्षा हो सके और पौधे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।
हरेला पर्व के इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें आसा नौटियाल सलोचना बिष्ट, बबली बर्थ्वाल, उपेंद्र विजलवाण, मुकेश नारायण, शर्मा, रविंद्र कश्यप, सतीश उनियाल, गीता बिष्ट, सहित सीमा जागरण मंच की अनेक बहनें एवं सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान सभी ने पर्यावरण संरक्षण, पहाड़ों की हरियाली बचाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
हरेला पर्व का यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि एक बीज आज बोया जाता है, तो वह आने वाले कल में एक वृक्ष बनकर न केवल फल और छाया देता है, बल्कि धरती को थामने का भी कार्य करता है।
जय भारत!
वंदे मातरम्!

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