दिल्ली, 20 अगस्त दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा “फोक थिएटर एज ए मीडियम ऑफ कम्युनिकेशन” विषय पर एक विशेष लेक्चर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जाने माने रंगकर्मी एवं फिल्म कलाकार, दिल्ली विश्वविद्यालय कल्चर काउंसिल के चेयरपर्सन और पीआरओ अनूप लाठर ने फोक थियेटर की बारीकियों पर गहन चर्चा के साथ संचार में इसके योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सभी फोक थियेटर जनता की भाषा होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थी होने के नाते आप ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोक विधाओं के डॉक्यूमेंटेशन, प्रिजर्वेशन और प्रमोशन पर अनुसंधान का काम कर सकते हैं। तब आप जान पाएंगे कि फोक थियेटर किस प्रकार समाज को संदेश देते हैं।
अनूप लाठर ने पत्रकारिता के युवा विद्यार्थियों को लोक संस्कृति और रंगमंच के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि संचार के बढ़ते क्षेत्र में इनकी क्या अहमियत है। उन्होंने कहा कि फोक थियेटर (लोक रंगमंच) प्रत्येक संस्कृति का केंद्र होता है। इस कला में संस्कृति के सभी तत्व मौजूद होते हैं। फोक थियेटर की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत कम सभ्यताओं के पास रंगमंच की समृद्ध परंपरा है। फोक थियेटर के रूप में एक सभ्यता के तौर पर भारत का संचार का आधार बहुत मजबूत रहा है, जो सदियों पुरानी और विश्वसनीय कहानी कहने की परंपराओं की सुनहरी विरासत से जुड़ा है।
इस अवसर पर उन्होंने भारत के विभिन्न प्रदेशों के फोक थिएटर के बारे में भी जानकारी दी। अनूप लाठर ने कहा कि जनसंचार के विद्यार्थी फोक थिएटर की परंपरा को आज के नजरिए से देखें और समझें, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आज के दौर की जीवन मूल्य प्रणालियों का प्रचार-प्रसार कर सकें। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) डॉ. संजय वर्मा ने इस लेक्चर सीरीज़ की अहमियत के बारे में बात करते हुए बताया कि इसका मकसद विद्यार्थियों को ऐसा व्यावहारिक अनुभव देना है, जो क्लासरूम में पढ़ाई जाने वाली सैद्धांतिक जानकारी को और बेहतर बनाता है। विद्यार्थियों ने इस लेक्चर को खूब पसंद किया और अंत में आज के वक्ता अनूप लाठर से विषय को लेकर सवाल-जवाब भी किए। एक विद्यार्थी के सवाल पर अनूप लाठर ने कहा कि फोक थियेटर और लोक विधाओं के संदेशों को तात्कालिक पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। जो बीत गया वह एक कहानी है, हमें वर्तमान संदर्भ में उनके संदेश को देखना चाहिए।
