31 जुलाई 2026 भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस हादसे के पीड़ितों के चार संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज एक पत्रकार वार्ता में भोपाल नगर निगम पर परित्यक्त कार्बाइड कारखाने के आसपास के मोहल्लों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति कर इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया। नेताओं ने इन इलाकों में सप्लाई हो रहे पीने के पानी की जांच पर एक रिपोर्ट पेश की। इसमें सामने आया कि जांचे गए पानी के करीब 70% नमूनों में मल के बैक्टीरिया (फीकल कोलीफॉर्म) पाए गए — यानी यह पानी बड़े पैमाने पर मल से दूषित है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा, “हमने इस महीने 30 समुदायों के नलों से 63 पानी के नमूने लिए, जिनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफार्म की पुष्टि हुई। यह स्पष्ट प्रमाण है कि 30 में से 19 समुदायों को दिया जा रहा पेयजल मल से दूषित है।” उन्होंने बताया कि अपर लेक (बड़ा तालाब) से आपूर्ति किए गए पानी के 90% नमूने और कोलार डैम से आपूर्ति किए गए पानी के 25% नमूने दूषित पाए गए।प
रित्यक्त यूनियन कार्बाइड कारखाने से सटे समुदायों के निवासी मल-दूषित पानी पीने से दूषित जल से होनी वाली बीमारियों और तकलीफों की चपेट में हैं। पूरे-पूरे परिवार दस्त और उल्टी की शिकायत कर रहे हैं, और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के बहुत अधिक मामले सामने आ रहे हैं,” भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा। उन्होंने बताया कि 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने ये माना की यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की वजह से यहाँ के रहवासियों का पानी जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित है और इन्ही जहरीले तत्वों से बचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने और पीने का साफ़ पानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव के अनुसार, अगस्त 2018 में पाइपलाइन के पानी में मल-संदूषण की शिकायतों के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को इस क्षेत्र में सीवेज लाइनें बिछाने और उचित जल-निकासी (ड्रेनेज) सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा, “बीएमसी ने तीन महीने में यह काम पूरा करने का वादा किया था, लेकिन पिछले आठ वर्षों में इस दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया गया है।”
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मल-दूषित पेयजल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर निवासियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले अधिकारियों को दंडित करने के लिए, भागीरथपुरा की तरह लोगों की जान जाने का इंतज़ार नहीं किया जाना चाहिए। हम मांग करते हैं कि इस क्षेत्र में सीवेज और ड्रेनेज की योजना का समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए और पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था तुरंत स्थापित की जाए।”
| नवाब खान एवं नसरीन | रशीदा बी | बालकृष्ण नामदेव
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रचना ढिंगरा |
| भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा | गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ | भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा | भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन |
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