नई दिल्ली, 8 सितम्बर, 2026 – दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में छात्रों के हाॅस्टल की वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के लिए डीडीए और एमसीडी की खाली इमारतों के इस्तेमाल करने की जांच के आदेश से क्या इतनी दिल्ली विश्वविद्यालय के 2.5 लाख छात्र जिनमें आधे से अधिक बाहर से पढ़ने आते है, उनके लिए रहने की व्यवस्था की जा सकती है? श्री यादव ने मांग की कि उपराज्यपाल के आदेश कि मकानों में चल रहे पीजी के स्ट्रक्चरल ऑडिट करके उन पर कार्रवाई करने से पहले लाखों छात्रों के लिए दिल्ली सरकारी हाॅस्टल की स्थाई व्यवस्था करें।
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 91 कॉलेजों में 71 काॅलेजों में हाॅस्टल की व्यवस्था है जिनमें अधिकतम 9000 सीटें है, जबकि दिल्ली में कुल सरकारी हॉस्टल की सीटें लगभग 30000 है। यह चिंताजनक है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिवर्ष हास्टल की मांग करने वाले 71000 छात्रों में से सिर्फ 10 प्रतिशत छात्रों को ही सीटें मिल पाती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो0 योगेश सिंह ने खुद डीयू में अगले साल तक हॉस्टल की सीटे दुगनी होने की बात करते हुए कहा है कि इनसे जरुरत पूरी नही होगी। उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली में बाहर से आकर रहने वाले छात्रों की हास्टल की समस्या गंभीर है, जिसके लिए दिल्ली सरकार, डीडीए और दिल्ली विश्वविद्यालय को स्थायी समाधान करना होगा। सरकार द्वारा पर्याप्त संख्या में हास्टल नही होने के कारण ही छात्र निजी मकानों में बने पीजी में रहने को मजबूर है।
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा की दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर बाहर से आए छात्रों के रहने की तुरंत बिना किसी शुल्क के व्यवस्था करें क्योंकि सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र प्राइवेट पीजी में रहने से डर रहे हैं।
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि एक तरफ उपराज्यपाल डीडीए और भूमि एवं विकास विभाग को विश्वविद्यालयों में नए हाॅस्टल के लिए एनओसी, जरुरी मंजूरियां और निर्माण के लिए एफएआर के लिए सहयोग देने के निर्देश दे दिए हैं और दूसरी तरफ दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की यह चिंता कि कई हॉस्टल पर काम तो शुरु हुआ है लेकिन अप्रूवल लेने, फंड इकट्ठा करने जैसी प्रक्रियाओं में अधिक वक्त लगता है। हाॅस्टल के लिए प्राइवेट पार्टनर के साथ मिलकर संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया है, क्या दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम सहित भाजपा के भ्रष्टाचार शासन में यह संभव हो सकता है?
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि निजी मकानों में चल रहे पीजी के स्ट्रक्चरल आॅडिट करने के नाम पर निगम अधिकारी कहीं इस आॅडिट को उगाही का साधन न बना ले, यह दिल्ली वालों की बड़ी चिंता है। क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अधिकारी हादसे की जिम्मेदारी से बच नही सकते। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा हादसे वाली इमारत के निर्माण के लिए वैध मंजूरी ली या नही, अगर मंजूरी दी तो किसने दी। यह सवाल कांग्रेस पहले ही उठा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकारी और विश्वविद्यालयों के छात्र हॉस्टल की कमी के कारण मजबूरी में पीजी में रहते है, इनकी सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि उपराज्यपाल के साथ बैठक में मुख्यमंत्री, एनडीआरएफ प्रमुख, निगम आयुक्त, पुलिस आयुक्त, दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और डीडीए के अधिकारी मौजूद थे। कांग्रेस की चिंता है कि पीजी के स्ट्रक्चरल ऑडिट की समीक्षा की जगह कहीं भाजपा सरकार लोगों को परेशान न करें, जिस पर उपराज्यपाल ने खुद कहा है कि छात्रों की समस्या गंभीर है जिसका समाधान जरूरी है। बिना सोचे समझे सीलिंग की कार्यवाही से बचना होगा क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो लाखों छात्र बेघर हो सकते है।
मुख्य संवाददाता, .नई दिल्ली।
