नई दिल्ली, 22 अक्टूबर, 2026 – दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि 8941 करोड़ की भाजपा की दिल्ली सरकार द्वारा यमुना पुनरुद्धार की 43 परियोजनाओं में 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ;डीएसटीपीद्ध और सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाने का शिलान्यास केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कराकर दिल्ली की जनता की आंखों में धूल झौंकने का काम किया है, क्योंकि 29 में से 27 डीएसटीपी के लिए फंड की मंजूरी अप्रैल 2025 में ही मिल चुकी थी। दिल्ली मंे 52 किलोमीटर लंबी यमुना रिवर फ्रंट योजना पर विशेषज्ञ चिंता जता रहे है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यमुना हर दिन अधिक विषैली बन रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा 2021-22 से 2025-26 तक अमृत मिशन-2 के तहत देश भर में 100 प्रतिशत सीवरेज कवरेज का लक्ष्य दिल्ली में धराशाही हो चुका है।
केन्द्र में भाजपा, दिल्ली में पिछली आम आदमी पार्टी और मौजूदा भाजपा सरकार 12 वर्षों में दिल्ली में नई सीवर और पानी की पाईप लाइन डालने का काम कराने में नाकाम साबित रही है। उन्होंने कहा कि 8941 करोड़ की योजनाओं में एसटीपी परियोजनाओं की शुरुआत केवल खोखली घोषणा है, क्योंकि 22 नालों का अनुपचारित मल वाला जल सीधा यमुना में गिरने की भाजपा सरकार ने अभी तक कोई उपाय नही किए है। जनता कभी भी एसटीपी और नालों से यमुना में गिरने वाले अनुपचारित मल के स्थान पर नही पहुॅच सकती, वो सिर्फ भाजपा के झूठे और खोखल विज्ञापन और भाषण सुनकर ही मान लेती है कि सब ठीक हो रहा है, लेकिन वास्तविकता कहीं भंयकर है जिस अंदरुनी रुप से सरकार के अधिकारी और विशेषज्ञ चिंताजनक है।
श्री देवेन्द्र यादव ने गृहमंत्री अमित शाह जी के पिछले 30 सालों से यमुना में 2000 टन प्रतिदिन गोबर डेयरियों में डालने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 1993-98 तक दिल्ली में भाजपा सरकार और 2007 से मौजूदा तक लगभग 20 वर्ष निगम में भाजपा का शासन है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जवाब दें कि अगर 30 वर्षों से 2000 टन प्रतिदिन गोबर यमुना में डालने के लिए कौन जिम्मेदार है, जबकि वास्तविकता में वर्तमान में 1500 टन गोबर या पशु अपशिष्ट उत्पन्न होता है, फिर जनसंख्या अनुपात के अनुसार लोगों के पास वर्षों पहले डेयरियों में इतने पशु कैसे हो सकते है कि प्रतिदिन 2000 टन गोबर यमुना में डाला जा सके। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता सिर्फ लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना जानते है, उन्हें वास्तविकताओं से कोई सरोकार नही है।
श्री देवेंद्र यादव ने कहा कि यमुना सफाई आवंटन (2026-27 हरित बजट) के तहत रेखा गुप्ता सरकार ने अपने 22,236 करोड़ रुपये के हरित बजट का सबसे बड़ा हिस्सा-6,485 करोड़ रुपये-दिल्ली जल बोर्ड के लिए नए एसटीपी बनाने, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने, प्रमुख नालों को रोकने और नदी के किनारे के हिस्सों में सुधार के लिए अलग रखा, जिनको अभी तक क्रियान्वित करने की दिशा में कोई काम नही हुआ। उन्हांेने कहा कि मैं रेखा गुप्ता से पूछना चाहता हूॅ कि चंद्रावल जल शोधन संयत्र, 358 अनाधिकृत कालोनियों ओर 113 गांवों में एसटीपी और सीवेज पम्पिंग स्टेशन की घोषणा जब पहले की गई तो फिर पुनः अमित शाह से यमुना पुनरुद्धार कार्यक्रम में क्यों शामिल किया गया।
श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि यमुना को साबरमती माॅडल की तर्ज पर सुधारने की भाजपा सरकार के बयान पर विशेषज्ञ चिंता जता रहे है क्योंकि यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क जैसी परियोजना को अंजाम देने के लिए निर्माण, हरित पट्टी, और सार्वजनिक सुविधाओं के बजाय नदी की सेहत में वास्तविक सुधार के आधार पर होने चाहिए। जबकि भाजपा खोखली घोषणा और करोड़ खर्च के दस्तावेजों की खाना पूर्ति करके यमुना की सफाई और संशोधित एसटीपी प्लांट और नए प्लांट बनाने पर 2 वर्षों में किसी परियोजना को पूरा नही किया है। आज जिन 43 परियोजनाओं का लोकार्पण अमित शाह जी ने किया उनका काम भी अभी आधा अधूरा ही है।

