ट्रेन हादसे में जान गंवाने पर पीड़ित परिवार को 18 लाख रुपये तक का मुआवजा कैसे मिलेगा?
ट्रेन हादसे में जान गंवाने पर पीड़ित परिवार को 18 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है, लेकिन एक छोटी सी चूक के कारण 10 लाख रुपये का इंश्योरेंस गंवाना पड़ सकता है। दरअसल, आईआरसीटीसी से ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुक करते समय सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख रुपये तक के ट्रैवल इंश्योरेंस का विकल्प मिलता है।
अब तक यह सुविधा केवल उन यात्रियों को मिलती थी जो आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप से टिकट बुक करते थे, जबकि रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से ऑफलाइन टिकट खरीदने वाले यात्री इससे वंचित रह जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस असमानता पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इंडियन रेलवे को निर्देश दिए हैं कि 27 अक्टूबर से काउंटर टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यह ट्रैवल इंश्योरेंस चुनने की सुविधा दी जाए। अदालत का मानना है कि ऑफलाइन टिकट बुक करने वाले 13 प्रतिशत यात्री अक्सर समाज के सबसे गरीब और निचले तबके से आते हैं, इसलिए उन्हें भी सुरक्षा का यह अधिकार मिलना बेहद जरूरी है।
आईआरसीटीसी की इस इंश्योरेंस स्कीम के तहत केवल 45 पैसे का मामूली प्रीमियम देकर बड़ा वित्तीय कवर हासिल किया जा सकता है। यह सुविधा पूरी तरह से ऐच्छिक है और यात्री इसे अपनी पसंद के अनुसार चुन या छोड़ सकते हैं। हादसे के दौरान मौत होने या स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी 10 लाख रुपये का भुगतान करती है। इसके अलावा, स्थायी आंशिक विकलांगता होने पर 7.5 लाख रुपये और अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए 2 लाख रुपये तक का कवर मिलता है।
अगर कोई यात्री यह 45 पैसे का इंश्योरेंस विकल्प नहीं चुनता है, तब भी दुर्घटना की स्थिति में रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 124 और 124A के तहत रेलवे की वैधानिक मुआवजे की देनदारी बनती है। इस नियम के तहत मृतक के परिजनों को रेलवे की तरफ से 8 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। हालांकि, केवल 45 पैसे का इंश्योरेंस लेने पर रेलवे के 8 लाख रुपये के मुआवजे के साथ बीमा कंपनी का 10 लाख रुपये का कवर जुड़ जाता है, जिससे पीड़ित परिवार को कुल 18 लाख रुपये की बड़ी आर्थिक मदद मिल सकती है।

